किस रोज़ तोहमतें न तराशा किए अदू
किस दिन हमारे सर पे न आरे चला किए
“Which day did foes not carve out fresh accusations anew?Which day did saws not ceaselessly cut into our head too?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
शत्रुओं ने हर दिन हम पर इल्ज़ाम गढ़े, और हमारे सिर पर आरे चलाकर हमें लगातार कष्ट पहुँचाया।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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