“The Imam of both seen and unseen, the Prince of form and its deep meaning, 'Ali', God's friend, His Lion, the Prophet's true successor, is he.”
अली ज़ाहिरी और बातिनी इमाम हैं, सूरत और मअनी के अमीर हैं। अली, अल्लाह के वली और अल्लाह के शेर हैं, और नबी के जानशीन हैं।
इमाम-ए-ज़ाहिर-ओ-बातिन अमीर-ए-सूरत-ओ-मअनी / 'अली' वली असदुल्लाह जानशीन-ए-नबी है वो इस दुनिया के भी नेता हैं जो हमें दिखाई देती है और उस दुनिया के भी जो हमारे मन के अंदर छिपी है। वो बाहरी रूप और उसके गहरे मतलब, दोनों के मालिक हैं। अली खुदा के दोस्त हैं और नबी की विरासत को संभालने वाले हैं। ज़ाहिर का मतलब होता है जो सबके सामने हो, और बातिन का मतलब है जो दिल के अंदर का राज़ हो। असदुल्लाह का मतलब है खुदा का शेर और जानशीन वो होता है जो किसी का उत्तराधिकारी बनकर उसकी जगह ले। दोस्त, ग़ालिब यहाँ एक ऐसी महान हस्ती की बात कर रहे हैं जो इंसान के बाहर और अंदर दोनों को रोशन करती है। हम अक्सर लोगों को सिर्फ उनके काम से जानते हैं, पर ग़ालिब कहते हैं कि अली वो हैं जो हमारी खामोशियों को भी समझते हैं। ये वैसा ही है जैसे कोई बड़ा भाई जो आपको सही रास्ता भी दिखाए और जब आप डरें तो आपका हौसला भी बढ़ाए। ग़ालिब हमें बता रहे हैं कि एक सच्चा रहनुमा वही होता है जिसे दुनिया की भी खबर हो और हमारे दिल की तड़प की भी। ये एक बहुत ही सुकून देने वाला अहसास है। जैसे एक ध्रुव तारा आसमान में चमकता तो सबको है, पर उसका असली काम उन मुसाफिरों को रास्ता दिखाना है जो अंधेरे में रास्ता खो चुके हों। असली रहनुमा वो है जो आपकी खामोशी को आपकी बातों से भी ज़्यादा अच्छी तरह समझ सके।
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