साक़ी-गरी की शर्म करो आज वर्ना हम
हर शब पिया ही करते हैं मय जिस क़दर मिले
“Today, show some grace in your cup-bearing, else know that we, you see,Each night, will drink the wine, whatever quantity there be.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
आज साक़ीगिरी में कुछ तो शर्म करो, वरना हम तो हर रात जितनी भी शराब मिले पी ही लेते हैं।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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