किस क़दर ख़ाक हुआ है दिल-ए-मजनूँ या रब
नक़्श-ए-हर-ज़र्रा सुवैदा-ए-बयाबाँ निकला
“O Lord, how Majnun's heart has turned to dust!Each particle, the desert's dark core, revealed.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
हे प्रभु, मजनूँ का हृदय कितना मिट्टी में मिल गया है। हर कण का निशान रेगिस्तान के काले केंद्र के रूप में उभरा।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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