बे-नवाई तर सदा-ए-नग़्मा-ए-शोहरत 'असद'
बोरिया यक नीस्ताँ-आलम बुलंद आवाज़ा था
“Oh Asad, my voicelessness is more profound than the song of fame; my humble mat possessed a loud repute, like a whole world of reed-beds.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
ऐ असद, मेरी ख़ामोशी शोहरत के गीत की आवाज़ से ज़्यादा असरदार है; मेरी मामूली चटाई की आवाज़ एक पूरे नरकुल के जंगल की तरह बुलंद थी।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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