हूँ चराग़ान-ए-हवस जूँ काग़ज़-ए-आतिश-ज़दा
दाग़ गर्म-ए-कोशिश-ए-ईजाद-ए-दाग़-ए-ताज़ा था
“I am a spectacle of desire, like paper set ablaze; my very scars were fervent to invent new grief.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मैं जलते हुए कागज़ के समान इच्छाओं का एक चराग़ान हूँ। मेरे दाग़ (निशान) नए दाग़ बनाने की कोशिश में गर्म थे।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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