बग़ल में ग़ैर की आज आप सोते हैं कहीं वर्ना — मिर्ज़ा ग़ालिब
बग़ल में ग़ैर की आज आप सोते हैं कहीं वर्ना
सबब क्या ख़्वाब में आ कर तबस्सुम-हा-ए-पिन्हाँ का
“Tonight you sleep in another's arms, I surmise,Else why these hidden smiles within my dream arise?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
कवि अनुमान लगाता है कि आज उनका प्रिय किसी और की बाहों में सो रहा है, अन्यथा मेरे सपने में आकर इतनी छिपी हुई मुस्कानें देने का क्या कारण होता?
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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