शरर-फ़ुर्सत निगह सामान-ए-यक-आलम चराग़ाँ है — मिर्ज़ा ग़ालिब

शरर-फ़ुर्सत निगह सामान-ए-यक-आलम चराग़ाँ है ब-क़द्र-ए-रंग याँ गर्दिश में है पैमाना महफ़िल का

“A glance, as fleeting as a spark, holds the means for a world of illumination,Here, the goblet of the assembly circulates, according to its own hue.”

— मिर्ज़ा ग़ालिब

अर्थ

एक चिंगारी जैसी क्षणिक नज़र में एक पूरी दुनिया को रोशन करने की शक्ति है। यहाँ महफिल का प्याला उसके रंग या उसकी प्रकृति के अनुसार घूमता है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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