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तड़प कर मर गया वो सैद-ए-बाल-अफ़्शाँ कि मुज़्तर था
हुआ नासूर-ए-चश्म-ए-ताज़ियत चश्म-ए-ख़दंग आख़िर

That restless, struggling prey with flapping wings at last did die,The arrow's eye became, at length, a festering sore in sorrow's eye.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

वह बेचैन, पंख फड़फड़ाता हुआ शिकार तड़प कर मर गया। अंततः, तीर का घाव शोक की आँख में एक नासूर बन गया।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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