यूँ ही गर रोता रहा 'ग़ालिब' तो ऐ अहल-ए-जहाँ
देखना इन बस्तियों को तुम कि वीराँ हो गईं
“If Ghalib keeps weeping thus, O people of the world,You will see these habitations turn desolate.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
यदि 'ग़ालिब' इसी तरह रोता रहा, तो ऐ दुनिया के लोगों, तुम देखना कि ये बस्तियाँ भी वीरान हो गईं।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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