क़यामत है कि सुन लैला का दश्त-ए-क़ैस में आना — मिर्ज़ा ग़ालिब

क़यामत है कि सुन लैला का दश्त-ए-क़ैस में आना तअ'ज्जुब से वो बोला यूँ भी होता है ज़माने में

“What a wonder, hearing of Layla's arrival in Qais's desert land; in utter amazement he cried, 'Does such a thing also happen in this world?'”

— मिर्ज़ा ग़ालिब

अर्थ

यह कितनी हैरान कर देने वाली बात है कि लैला के क़ैस (मजनूँ) के जंगल में आने की ख़बर सुनकर वह अचरज से बोल उठा, "क्या दुनिया में ऐसा भी कभी होता है?"

विस्तार

इस शेर में उस गहरी हैरानी और बेयक़ीनी को बयां किया गया है, जब किसी आशिक़ की ज़िंदगी में कोई नामुमकिन सा ख़्वाब सच हो जाए। क़ैस (मजनूँ) ने जुदाई और सेहरा की ख़ाक छानते हुए इतना दर्द सहा है कि जब उसे पता चलता है कि लैला ख़ुद उससे मिलने बियाबान में आई है, तो उसे अपनी क़िस्मत पर भरोसा ही नहीं होता। वह ताज्जुब से पूछता है कि क्या इस बेरहम दुनिया में कभी मोहब्बत मुकम्मल भी होती है, जो इस बात को बेहद भावुक और दिलकश बना देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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