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सुख़न क्या कह नहीं सकते कि जूया हूँ जवाहिर के
जिगर क्या हम नहीं रखते कि खोदें जा के मादन को

Can we not speak, we who are seekers of jewels? Do we not possess the courage to go and excavate the mine?

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

कवि प्रश्न करता है कि क्या हम बोल नहीं सकते, जबकि हम जवाहरात के खोजी हैं? क्या हममें इतना जिगर नहीं कि जाकर खान खोदें?

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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