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लुटता दिन को तो कब रात को यूँ बे-ख़बर सोता! रहा खटका चोरी का दुआ देता हूँ रहज़न को

Had I not been plundered in the day, how could I sleep so unaware at night?No longer fearing theft, I bless the highwayman.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

अगर मैं दिन में न लुटा होता, तो रात को इतनी बेखबर नींद कैसे सो पाता? अब चोरी का कोई डर नहीं रहा, इसलिए मैं लुटेरे को दुआ देता हूँ।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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