चार मौज उठती है तूफ़ान-ए-तरब से हर सू मौज-ए-गुल मौज-ए-शफ़क़ मौज-ए-सबा मौज-ए-शराब

“Four waves surge on every side from the tempest of delight: a wave of roses, a wave of twilight, a wave of breeze, a wave of wine.”

— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

खुशी के तूफ़ान से चारों दिशाओं में चार लहरें उठ रही हैं: फूलों की लहर, शाम की लाली की लहर, सुबह की हवा की लहर और शराब की लहर।

विस्तार

यह शेर ख़ुशी और जश्न के उस आलम को बयां करता है जहाँ आनंद कोई हल्की फुहार नहीं, बल्कि हुस्न और सुरूर का एक तूफ़ान बनकर उमड़ पड़ता है। शायर ने चार मदहोश करने वाली लहरों का ज़िक्र किया है—फूलों का खिलना, ढलती शाम की लाली, पुरकैफ़ हवा और शराब की मस्ती। यह उस जादुई लम्हे की तस्वीर है जब इंसान का रोम-रोम ज़िंदगी की बेपनाह ख़ूबसूरती और बेख़ुदी में पूरी तरह डूब जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.