फ़ुर्सत-ए-आराम-ए-ग़श हस्ती है बोहरान-ए-अदम — मिर्ज़ा ग़ालिब

फ़ुर्सत-ए-आराम-ए-ग़श हस्ती है बोहरान-ए-अदम है शिकस्त-ए-रंग-ए-इम्काँ गर्दिश-ए-पहलू मुझे

“Life is but a swoon’s brief rest, a crisis of non-being's tide; The fading hue of what could be is my restless turning from side to side.”

— मिर्ज़ा ग़ालिब

अर्थ

अस्तित्व अदम (ग़ैर-मौजूदगी) के संकट में बेहोशी के दौरान मिलने वाला एक संक्षिप्त आराम है, और संभावनाओं के रंग का फीका पड़ना मेरे लिए केवल बेचैनी में करवटें बदलने जैसा है।

विस्तार

ग़ालिब यहाँ ज़िंदगी को किसी बीमार की उस बेहोशी जैसा बताते हैं, जो न होने यानी शून्यता के गहरे दर्द के बीच पल भर का झूठा आराम देती है। वे अपने वजूद को एक ऐसे तड़पते मरीज़ की तरह देखते हैं जो बिस्तर पर करवटें बदल रहा है, और जिसके हर सपने व संभावना का रंग धीरे-धीरे फीका पड़ रहा है। असल में, यह शेर बताता है कि हमारा सारा जीवन 'अदम' के असीम सन्नाटे में बस एक बेचैन, अधूरी करवट भर है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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