रह-ए-ख़्वाबीदा थी गर्दन-कश-ए-यक-दर्स-ए-आगाही — मिर्ज़ा ग़ालिब
“The slumbering path resisted a single lesson in awareness; my footprint strikes the earth like a master's waking slap.”
अर्थ
सोया हुआ रास्ता चेतना का एक सबक भी सीखने को तैयार नहीं था, इसलिए ज़मीन पर मेरे क़दम का निशान उस्ताद के उस तमाचे जैसा है जो उसे जगाने के लिए मारा गया हो।
विस्तार
ग़ालिब यहाँ एक दिलचस्प मंज़र खींचते हैं, जहाँ यह सोई हुई दुनिया उस ज़िद्दी शागिर्द की तरह है जो बेदारी और समझ का सबक़ सीखने को तैयार नहीं थी। ऐसे में शायर का हर क़दम ज़मीन के लिए उस्ताद के उस थप्पड़ की तरह साबित होता है, जो सोए हुए तालिब-इल्म को झकझोर कर जगा देता है। इसका गहरा अर्थ यह है कि एक जाग्रत और बा-शऊर इंसान की मौजूदगी पूरी बेख़बर कायनात को होश और चेतना से भर देती है।
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