न होगा यक-बयाबाँ माँदगी से ज़ौक़ कम मेरा — मिर्ज़ा ग़ालिब
“Weariness from a single wilderness cannot quench my ardent zeal; each footprint I leave behind is but a bubble on the wave of speed.”
अर्थ
सिर्फ एक रेगिस्तान की थकान से मेरा जोश कम नहीं होगा, क्योंकि मेरे क़दमों का निशान मेरी तेज़ रफ़्तार की लहर पर महज़ एक बुलबुला है।
विस्तार
ग़ालिब यहाँ अपने जुनूँ और कभी न ख़त्म होने वाले हौसले की बात कर रहे हैं। वे कहते हैं कि किसी एक बियाबान या मुश्क़िल रास्ते की थकान उनके चलने के शौक़ को ज़रा भी कम नहीं कर सकती। उनकी रफ़्तार इतनी तेज़ है कि ज़मीन पर उनके क़दमों के निशान भी ठहरते नहीं, बल्कि तेज़ लहर पर उठने वाले बुलबुलों की तरह बस एक पल को बनते हैं और वह आगे निकल जाते हैं।
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