वो हल्क़ा-हा-ए-ज़ुल्फ़ कमीं में हैं या ख़ुदा — मिर्ज़ा ग़ालिब

वो हल्क़ा-हा-ए-ज़ुल्फ़ कमीं में हैं या ख़ुदा रख लीजो मेरे दावा-ए-वारस्तगी की शर्म

“Those rings of her tresses are in ambush, O God! Preserve the honour of my claim to detachment.”

— मिर्ज़ा ग़ालिब

अर्थ

हे ईश्वर, उसकी ज़ुल्फों के घेरे घात लगाए बैठे हैं। मेरे वैराग्य के दावे की लाज रख लीजिए।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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