न सोवे आबलों में गर सरिश्क-ए-दीदा-ए-नाम से
ब-जौलाँ-गाह-ए-नौमीदी निगाह-ए-आजिज़ाँ पा है
“If tears from the moist eye would not rest within the blisters, It is because the helpless gaze has found despair's far frontiers.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
यदि नम आँखों के आँसू छालों में नहीं ठहरते, तो इसका कारण यह है कि लाचार निगाह ने निराशा के विशाल विस्तार को पा लिया है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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