'असद' गर नाम-ए-वाला-ए-'अली ता'वीज़-ए-बाज़ू हो
ग़रीक़-ए-बहर-ए-ख़ूँ-तिमसाल दर-आईना रहता है
“Asad, if the exalted name of Ali becomes an amulet for the arm, The image of one drowned in a sea of blood remains within the mirror.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
अगर असद के बाजू पर हज़रत अली का बुलंद नाम एक तावीज़ बन जाए, तो भी लहू के सागर में डूबे हुए व्यक्ति का प्रतिबिंब आइने में रहता है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
