मिलती है ख़ू-ए-यार से नार इल्तिहाब में
काफ़िर हूँ गर न मिलती हो राहत अज़ाब में
“The fire, in its blaze, draws its nature from the beloved's temperament;I'd be an infidel if comfort weren't found even in torment.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
आग अपनी तीव्र ज्वाला में भी प्रिय के स्वभाव से अपना रंग-ढंग पाती है। मैं काफ़िर हो जाऊँगा, यदि मुझे तकलीफ़ में भी राहत न मिले।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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