गर्मी सही कलाम में लेकिन न इस क़दर
की जिस से बात उस ने शिकायत ज़रूर की
“Warmth, yes, was in his words, but not to such a measure,That the one he spoke with, surely voiced displeasure.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
उनके शब्दों में गर्मी तो थी, लेकिन इतनी नहीं कि जिससे उन्होंने बात की, उसने ज़रूर शिकायत की।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
