तुम कौन से थे ऐसे खरे दाद-ओ-सितद के करता मलक-उल-मौत तक़ाज़ा कोई दिन और

“What kind of honest dealings had you, that the Angel of Death would have demanded a few more days?”

— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

तुम्हारे ऐसे कौन से खरे लेन-देन थे कि मृत्यु का फ़रिश्ता कुछ और दिन की मोहलत माँगता? इसका अर्थ है कि व्यक्ति के लेन-देन इतने खरे नहीं थे कि उसे अधिक जीवन मिलता।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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