पा-ए-अफ़गार पे जब से तुझे रहम आया है — मिर्ज़ा ग़ालिब

पा-ए-अफ़गार पे जब से तुझे रहम आया है ख़ार-ए-रह को तिरे हम मेहर-ए-गिया कहते हैं

“Ever since your pity fell on my wounded feet, we now call the thorns of your path 'the nurturing sun'.”

— मिर्ज़ा ग़ालिब

अर्थ

जब से आपको मेरे ज़ख्मी पैरों पर दया आई है, तब से हम आपके रास्ते के काँटों को पोषण देने वाला सूरज कहते हैं।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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