ग़ज़ल

की वफ़ा हम से तो ग़ैर इस को जफ़ा कहते हैं

کی وفا ہم سے تو غیر اس کو جفا کہتے ہیں
मिर्ज़ा ग़ालिब· Ghazal· 9 shers· radif: हैं

यह ग़ज़ल समाज द्वारा गलत समझे जाने और गलत आँके जाने के दर्द को बयान करती है, जहाँ वफ़ादारी को ज़ुल्म और नेक इरादों को बुरा समझा जाता है। कवि एक गहरे, अवर्णनीय दुःख को व्यक्त करता है, अपनी पीड़ा को ज़ाहिर करने की निरर्थकता और एक ऐसे माहौल में हार मानने की भावना को उजागर करता है जहाँ सच्ची भावनाओं को अक्सर खारिज कर दिया जाता है।

Source: rekhta · HI

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शेर दर शेर अर्थ

लिपि व अर्थ
1
की वफ़ा हम से तो ग़ैर इस को जफ़ा कहते हैं होती आई है कि अच्छों को बुरा कहते हैं
जब मैं वफ़ादारी दिखाता हूँ, तो दूसरे इसे बेवफ़ाई (विश्वासघात) कहते हैं। यह हमेशा से होता आया है कि अच्छे लोगों को बुरा कहा जाता है।
2
आज हम अपनी परेशानी-ए-ख़ातिर उन से कहने जाते तो हैं पर देखिए क्या कहते हैं
आज हम अपने दिल की परेशानी लेकर उनके पास जा रहे हैं। हम उनसे अपनी बात कहने तो जा रहे हैं, पर देखिए वे क्या कहते हैं।
3
अगले वक़्तों के हैं ये लोग इन्हें कुछ न कहो जो मय ओ नग़्मा को अंदोह-रुबा कहते हैं
ये पुराने समय के लोग हैं, इनसे कुछ न कहो; जो शराब और संगीत को दुःख हरने वाला कहते हैं।
4
दिल में आ जाए है होती है जो फ़ुर्सत ग़श से और फिर कौन से नाले को रसा कहते हैं
जब बेहोशी से थोड़ी फुर्सत मिलती है, तो वह दिल में आ बसता है; और तब, किस दूसरे नाले को असरदार कहा जा सकता है?
5
है पर-ए-सरहद-ए-इदराक से अपना मसजूद क़िबले को अहल-ए-नज़र क़िबला-नुमा कहते हैं
हमारा पूज्य हमारी समझ की सीमा से परे है। ज्ञानीजन किबला को मात्र दिशासूचक कहते हैं।
6
पा-ए-अफ़गार पे जब से तुझे रहम आया है ख़ार-ए-रह को तिरे हम मेहर-ए-गिया कहते हैं
जब से आपको मेरे ज़ख्मी पैरों पर दया आई है, तब से हम आपके रास्ते के काँटों को पोषण देने वाला सूरज कहते हैं।
7
इक शरर दिल में है उस से कोई घबराएगा क्या आग मतलूब है हम को जो हवा कहते हैं
मेरे दिल में एक चिंगारी है, उससे कोई क्या घबराएगा? हमें तो आग चाहिए, और जिसे लोग हवा कहते हैं, वही हमारी आग को बढ़ाने वाली है।
8
देखिए लाती है उस शोख़ की नख़वत क्या रंग उस की हर बात पे हम नाम-ए-ख़ुदा कहते हैं
हम देखते हैं कि उस चंचल की अकड़ क्या रंग लाती है। उसकी हर बात पर हम 'नाम-ए-ख़ुदा' कहते हैं।
9
'वहशत' ओ 'शेफ़्ता' अब मर्सिया कहवें शायद मर गया 'ग़ालिब'-ए-आशुफ़्ता-नवा कहते हैं
शायद अब 'वहशत' और 'शेफ़्ता' मरसिया कहेंगे, क्योंकि लोग कहते हैं कि परेशान हाल आवाज़ वाले 'ग़ालिब' का निधन हो गया है।
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