ब-पास-ए-शोख़ी-ए-मिज़्गाँ सर-ए-हर-ख़ार सोज़न है
तबस्सुम बर्ग-ए-गुल को बख़िया-ए-दामन न हो जावे
“In deference to her lashes' playful art, each thorn's tip is a needle; Oh, lest her smile become the stitching for a rose petal's hem.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
उसकी चंचल पलकों के सम्मान में, हर काँटे की नोक एक सुई है; कहीं ऐसा न हो कि उसकी मुस्कान गुलाब की पंखुड़ी के दामन की सिलाई बन जाए।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
