फ़शार-ए-तंगी-ए-ख़ल्वत से बनती है शबनम
सबा जो ग़ुंचे के पर्दे में जा निकलती है
“From pressure of secluded narrowness, the dew is born,As morning breeze through bud's veiled folds makes its egress.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
एकांत की तंगी के दबाव से ओस बनती है, जब सुबह की हवा कली के परदे में से निकलती है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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