नहीं ज़रीया-ए-राहत जराहत-ए-पैकाँ
वो ज़ख़्म-ए-तेग़ है जिस को कि दिल-कुशा कहिए
“An arrow's wound no solace can impart,The sword's deep gash, that opens up the heart.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
तीर का घाव आराम का साधन नहीं होता। वह तो तलवार का ज़ख़्म है जिसे दिल को खुश करने वाला कहा जाए।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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पाठ
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