वो नेश्तर सही पर दिल में जब उतर जावे
निगाह-ए-नाज़ को फिर क्यूँ न आश्ना कहिए
“Though it's a lancet, when it penetrates the heart,Why should we not call that coquettish glance a trusted friend?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
वह भले ही एक नेश्तर हो, पर जब वह दिल में उतर जाए, तो उस नाज़ भरी निगाह को अपना परिचित क्यों न मानें?
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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