ग़ज़ल
कहते तो हो तुम सब कि बुत-ए-ग़ालिया-मू आए
کہتے تو ہو تم سب کہ بتِ غالیہ مو آئے
यह ग़ज़ल महबूब के आगमन की अत्यधिक उत्सुकता और अविश्वास को दर्शाती है। प्रिय की उपस्थिति इतनी तीव्र और मायावी है कि यह बिजली, लौ और पारे जैसी लगती है, जीवन-मरण के संघर्ष के क्षणों में भी इसे समझना मुश्किल है। शायर का गहरा प्रेम एक प्रतीक्षित, फिर भी लगभग अगम्य, महबूब की जीवंत कल्पना के माध्यम से व्यक्त होता है।
Source: rekhta · HI
गीत सुनें
1
कहते तो हो तुम सब कि बुत-ए-ग़ालिया-मू आए
यक मर्तबा घबरा के कहो कोई कि वो आए
तुम सब केवल यह कहते हो कि कस्तूरी-सुगंधित प्रियतम आ गए हैं। कोई एक बार घबराकर कहे कि 'वो आ गए!'
2
हूँ कशमकश-ए-नज़अ' में हाँ जज़्ब-ए-मोहब्बत
कुछ कह न सकूँ पर वो मिरे पूछने को आए
मैं मृत्यु की पीड़ा में हूँ, हाँ, प्रेम के आकर्षण के कारण। मैं कुछ कह नहीं सकता, पर वे मेरा हाल पूछने आए।
3
है साइक़ा ओ शो'ला ओ सीमाब का आलम
आना ही समझ में मिरी आता नहीं गो आए
यह बिजली, आग की लपट और पारे जैसी चंचल अवस्था है। हालांकि यह सामने आती है, फिर भी मेरी समझ में नहीं आती।
4
ज़ाहिर है कि घबरा के न भागेंगे नकीरैन
हाँ मुँह से मगर बादा-ए-दोशीना की बू आए
यह स्पष्ट है कि नकीरैन घबराकर भागेंगे नहीं, पर शायर को चिंता है कि क्या हो अगर उनके मुँह से पिछली रात की शराब की गंध आए।
5
जल्लाद से डरते हैं न वाइ'ज़ से झगड़ते
हम समझे हुए हैं उसे जिस भेस में जो आए
हम न जल्लाद से डरते हैं और न ही उपदेशक से झगड़ते हैं, क्योंकि हमने उस परम सत्य को समझ लिया है, जो किसी भी रूप या वेश में आए, हम उसे पहचान लेते हैं।
6
हाँ अहल-ए-तलब कौन सुने ताना-ए-ना-याफ़्त
देखा कि वो मिलता नहीं अपने ही को खो आए
हाँ, ऐ चाहने वालों, न मिलने के ताने कौन सुने? यह देखा कि वह मिलता नहीं तो हम अपने आप को ही खो आए।
7
अपना नहीं ये शेवा कि आराम से बैठें
उस दर पे नहीं बार तो का'बे ही को हो आए
यह हमारी आदत नहीं कि हम आराम से बैठें। अगर उस दर पर प्रवेश नहीं मिलता, तो हम का'बे ही चले जाएँगे।
8
की हम-नफ़सों ने असर-ए-गिर्या में तक़रीर
अच्छे रहे आप इस से मगर मुझ को डुबो आए
मेरे साथियों ने मेरे आँसुओं के असर में बात की। आप तो इससे अप्रभावित रहे, लेकिन आकर मुझे डुबो गए।
9
उस अंजुमन-ए-नाज़ की क्या बात है 'ग़ालिब'
हम भी गए वाँ और तिरी तक़दीर को रो आए
ग़ालिब, उस अंजुमन-ए-नाज़ की क्या बात है! हम भी वहाँ गए और तुम्हारी तक़दीर पर रो आए।
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