शब नज़ारा-परवर था ख़्वाब में ख़याल उस का — मिर्ज़ा ग़ालिब

शब नज़ारा-परवर था ख़्वाब में ख़याल उस का सुब्ह मौजा-ए-गुल को नक़्श-ए-बोरिया पाया

“Last night, her image filled my dream, a spectacle so fair;At dawn, the wave of blossoms turned to just a mat's faint wear.”

— मिर्ज़ा ग़ालिब

अर्थ

रात को उसका ख़याल मेरे ख़्वाब में एक शानदार नज़ारा बना हुआ था। सुबह, फूलों की वो लहर एक पुरानी चटाई के निशान जैसी पाई गई, यानी सपने की सुंदरता बस एक भ्रम निकली।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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