क़यामत है कि होवे मुद्दई का हम-सफ़र 'ग़ालिब'
वो काफ़िर जो ख़ुदा को भी न सौंपा जाए है मुझ से
“It is doomsday, Ghalib, that my rival becomes his companion,That infidel (my beloved) whom I cannot entrust even to God himself.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
यह क़यामत है, 'ग़ालिब', कि मेरा प्रतिद्वंद्वी उस बेवफ़ा का हमसफ़र बन जाए, जिसे मैं ख़ुदा के भरोसे भी नहीं छोड़ सकता।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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