कार-गाह-ए-हस्ती में लाला दाग़-सामाँ है — मिर्ज़ा ग़ालिब
कार-गाह-ए-हस्ती में लाला दाग़-सामाँ है
बर्क़-ए-ख़िर्मन-ए-राहत ख़ून-ए-गर्म-ए-दहक़ाँ है
“In existence's workshop, the tulip holds its brand as its all; The lightning to comfort's harvest is the warm blood of the farmer.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
सृष्टि की कार्यशाला में, लाला (ट्यूलिप) अपने दाग़ को ही अपना सर्वस्व और पहचान मानता है। सुख और आराम की फसल को नष्ट करने वाली बिजली किसान का गर्म रक्त है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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