तेशे बग़ैर मर न सका कोहकन 'असद'
सरगश्ता-ए-ख़ुमार-ए-रुसूम-ओ-क़ुयूद था
“The mountain-digger could not die without his pickaxe, Asad,He was dizzy with the stupor of customs and traditions.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
कोहकन (फरहाद) अपने फावड़े के बिना मर न सका, 'असद', क्योंकि वह रस्मों और बंधनों के खुमार में डूबा हुआ था। वह रिवाजों से इतना बँधा था कि मरने के लिए भी उसे अपने आदी उपकरण की आवश्यकता थी।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
