ग़ारत-गर-ए-नामूस न हो गर हवस-ए-ज़र
क्यूँ शाहिद-ए-गुल बाग़ से बाज़ार में आवे
“If greed for wealth did not dishonor's shroud cast,Why would the flower's beauty to the market be passed?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
यदि धन की लालच सम्मान को नष्ट न करती, तो फूल की सुंदरता बाग़ से बाज़ार में क्यों आती?
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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