हूँ मैं भी तमाशाई-ए-नैरंग-ए-तमन्ना — मिर्ज़ा ग़ालिब

हूँ मैं भी तमाशाई-ए-नैरंग-ए-तमन्ना मतलब नहीं कुछ इस से कि मतलब ही बर आवे

“I too am a spectator to desire's wondrous illusions; it matters not at all to me whether my purpose is fulfilled.”

— मिर्ज़ा ग़ालिब

अर्थ

मैं भी ख़्वाहिशों के बदलते रंगों और तमाशों का महज़ एक दर्शक हूँ; मुझे इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि मेरा मक़सद या मुराद पूरी होती है या नहीं।

विस्तार

इस शेर में ग़ालिब ख़्वाहिशों की अंधी दौड़ से ख़ुद को अलग करके एक बेपरवाह तमाशबीन की तरह खड़े हो जाते हैं। वे तमन्नाओं को किसी मंज़िल पर पहुँचने का ज़रिया नहीं, बल्कि दिल का एक रंग-बिरंगा और दिलकश तमाशा मानते हैं। उनका कहना है कि मुराद पूरी हो या अधूरी रह जाए, इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता; असली लुत्फ़ तो बस इस बात में है कि इंसान की उम्मीदें किस तरह पल-पल रंग बदलती हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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