ग़ज़ल

हूँ मैं भी तमाशाई-ए-नैरंग-ए-तमन्ना

ہوں میں بھی تماشائی نیرنگ تمنا

यह ग़ज़ल मानवीय इच्छाओं के प्रति एक दार्शनिक और विरक्त दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जहाँ कवि स्वयं को तमन्नाओं के मायाजाल का एक दर्शक मानता है। इसमें फल या प्राप्ति की चिंता किए बिना केवल चाहत और जीवन के विविध रंगों को एक तमाशे की तरह देखने का गहरा भाव व्यक्त हुआ है।

Source: rekhta · HI

गीत सुनें

शेर दर शेर अर्थ

लिपि व अर्थ
1
हूँ मैं भी तमाशाई-ए-नैरंग-ए-तमन्ना मतलब नहीं कुछ इस से कि मतलब ही बर आवे
मैं भी ख़्वाहिशों के बदलते रंगों और तमाशों का महज़ एक दर्शक हूँ; मुझे इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि मेरा मक़सद या मुराद पूरी होती है या नहीं।
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