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हर एक ज़र्रा-ए-आशिक़ है आफ़ताब-परस्त गई ख़ाक हुए पर हवा-ए-जल्वा-ए-नाज़

Each particle of the lover is a sun-worshipper,Even after turning to dust, the yearning for your graceful splendor did not depart.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

आशिक़ का हर एक ज़र्रा आफ़ताब-परस्त है। ख़ाक हो जाने पर भी महबूब के नाज़ुक जलवे की तमन्ना ख़त्म नहीं होती।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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