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हनूज़ ऐ असर-ए-दीद नंग-ए-रुस्वाई
निगाह फ़ित्ना-ख़िराम ओ दर-ए-दो-आलम बाज़

Still, O impact of vision, disgrace's shame holds sway, A glance that stirs up mischief, and both worlds' doors give way.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

अभी भी, हे दृष्टि के प्रभाव, रुस्वाई की शर्म कायम है। एक फ़ित्ना फैलाने वाली निगाह है, और दोनों जहाँ के दरवाज़े खुले हैं।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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