बे-ख़ुदी बिस्तर-ए-तम्हीद-ए-फ़राग़त हो जो
पुर है साए की तरह मेरा शबिस्ताँ मुझ से
“Should self-oblivion be a bed of calm repose, My chamber, like a shadow, with my own being overflows.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
अगर आत्मविस्मृति परम शांति और विश्राम का बिस्तर बन जाए, तो मेरा कमरा मेरी ही उपस्थिति से, एक परछाई की तरह, पूरी तरह भरा हुआ है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
