कुंज-ए-तारीक-ओ-कमीं-गीरी-ए-अख़्तर शुमरी
'ऐनक-ए-चश्म बना रौज़न-ए-ज़िंदाँ मुझ से
“From a dark corner and in hiding, you counted the stars,I made the prison's opening the very spectacles for my eyes.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
तुमने एक अंधेरे कोने से छिपकर तारे गिने, और मैंने कारागार के रोशनदान को अपनी आँखों का चश्मा बना लिया।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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