हम से खुल जाओ ब-वक़्त-ए-मय-परस्ती एक दिन — मिर्ज़ा ग़ालिब
हम से खुल जाओ ब-वक़्त-ए-मय-परस्ती एक दिन
वर्ना हम छेड़ेंगे रख कर उज़्र-ए-मस्ती एक दिन
“Unburden yourself to us, at the time of wine-drinking, one day,Otherwise, we will tease you, feigning intoxication, one day.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
किसी दिन शराब पीते समय हमसे अपने दिल की बात कह दो। नहीं तो, एक दिन हम नशे का बहाना बनाकर तुम्हें छेड़ेंगे।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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पाठ
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