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जुज़ इज्ज़ क्या करूँ ब-तमन्ना-ए-बे-ख़ुदी
ताक़त हरीफ़-ए-सख़्ती-ए-ख़्वाब-ए-गिराँ नहीं

What can I do but be helpless, in my yearning for ecstasy, My strength is no match for the rigour of deep slumber.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

मैं आत्म-विस्मृति की इच्छा में लाचारी के सिवा और क्या करूँ? मेरी शक्ति गहरी नींद की कठोरता का मुकाबला नहीं कर सकती।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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