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या-रब वो न समझे हैं न समझेंगे मिरी बात
दे और दिल उन को जो न दे मुझ को ज़बाँ और

O Lord, they neither understood nor ever will understand my plea,Give them another heart, if You're not giving me another tongue to speak.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

हे ईश्वर, वे मेरी बात न तो समझे हैं और न ही कभी समझेंगे। उन्हें कोई और दिल दे दे, अगर तू मुझे कोई और जुबान नहीं देता।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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