ता चंद पस्त फ़ितरती-ए-तब-ए-आरज़ू
या रब मिले बुलंदी-ए-दस्त-ए-दुआ मुझे
“How long will the mean nature of desire persist? O Lord, grant me the loftiness of a praying hand.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
कब तक आरज़ू (इच्छा) का नीच स्वभाव रहेगा? हे प्रभु, मुझे दुआ के हाथ की ऊँचाई मिले।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
