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हर चंद उम्र गुज़री आज़ुर्दगी में लेकिन है शरह-ए-शौक़ को भी जूँ शिकवा ना-तमामी

Though life has passed in sorrow and in pain,My passion's very tale, like a complaint, remains incomplete.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

हालाँकि मेरी उम्र दुख में गुज़री, फिर भी मेरे शौक़ का बयान, एक शिकायत की तरह, अधूरा ही रहा।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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