वाँ कुंगुर-ए-इस्तिग़्ना हर-दम है बुलंदी पर
याँ नाले को और उल्टा दावा-ए-रसाई है
“There, the turret of indifference is ever on a height,Here, the lament perversely claims access to its might.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
वहाँ बेपरवाही का बुर्ज हमेशा ऊँचाई पर है। यहाँ, इसके विपरीत, फ़रियाद उस तक पहुँचने का दावा करती है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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