Sukhan AI
ग़म-ए-फ़िराक़ में तकलीफ़-ए-सैर-ए-बाग़ न दो
मुझे दिमाग़ नहीं ख़ंदा-हा-ए-बेजा का

In grief of absence, trouble me not with garden's sight,For empty laughter, my heart finds no delight.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

विरह के दुःख में मुझे बाग़ घूमने की तकलीफ़ न दो। मुझे व्यर्थ की हँसी में कोई रुचि नहीं है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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