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ये जानता हूँ कि तू और पासुख़-ए-मकतूब
मगर सितम-ज़दा हूँ ज़ौक़-ए-ख़ामा-फ़रसा का

I know you and a letter's reply are miles apart,Yet I'm afflicted by the urge to write, this weary art.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

मैं जानता हूँ कि तुम और पत्र का जवाब मिलना असंभव है। फिर भी, मुझे लिखने की इच्छा ने सता रखा है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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