बहरा हूँ मैं तो चाहिए दूना हो इल्तिफ़ात
सुनता नहीं हूँ बात मुकर्रर कहे बग़ैर
“As I am deaf, your kindness must be twofold,I cannot hear a word until it's twice told.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मैं बहरा हूँ, इसलिए आपकी कृपा दोगुनी होनी चाहिए। मैं कोई भी बात तब तक नहीं सुनता जब तक उसे बार-बार न कहा जाए।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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पाठ
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